अंत

अटकलें बाज़ार में थी कि दुनिया तबाह होगी..क़यामत के बाद आदम हव्वा की नई सुबह होगी.. समंदर से शायद सैलाब भी आयेगा..आसमान से कोई आग भी बरसाएगा..धरती हमारे बोझ से थक जाएगी..शायद शून्य पर जम जाएगी.. चंद्रग्रहण अब लाल होगा..तांडव करता जब काल होगा..बारह वर्ष बरसात ना रुकेगी..पृथ्वी जब अक्ष पे ना घूमेगी.. क्षुद्र ग्रह … Continue reading अंत

पर अकेला चल रहा..

छोटे से इस मकान से, घने भरे श्मशान से, हर कब्र को मैं गिन रहा मैं जुगनुओं को सुन रहा है रात का खौफ यूं, मैं मोम सा पिघल रहा पर अकेला चल रहा पर अकेला चल रहा कफ़न की भी क्या जाति है? कितने चले बाराती है? मासूम से क्या छीन रहा मैं साथ … Continue reading पर अकेला चल रहा..